महायुति 'हिंदू-मराठी मेयर' पर अड़ी, AIMIM ने उठाया 'मुस्लिम महिला मेयर' का नारा; वारिस पठान का बयान - कलमा पढ़ने वाली हिजाब वाली महिला बनेगी महापौर
मुंबई, 5 जनवरी 2026: मुंबई नगर निगम (BMC) चुनाव 2026 की सरगर्मी में विकास और स्थानीय मुद्दों की जगह अब धर्म और पहचान का ध्रुवीकरण छा गया है। महायुति गठबंधन (बीजेपी-शिवसेना-एनसीपी) 'हिंदू-मराठी मेयर' बनाने का दावा कर रहा है, जहां मंत्री नितेश राणे ने कहा, "'आई लव महादेव' बोलने वाला ही मुंबई का मेयर बनेगा, 'आई लव मोहम्मद' वाले पाकिस्तान या कराची जाएं।" वहीं AIMIM ने 'मुस्लिम महिला मेयर' का मुद्दा उठाया। AIMIM नेता वारिस पठान ने धारावी रैली में कहा, "हमारा सपना है कि कलमा पढ़ने वाली मुस्लिम महिला मुंबई की महापौर बने। अगर मुसलमान राष्ट्रपति, मुख्यमंत्री और मुख्य न्यायाधीश बन सकता है, तो हिजाब पहनने वाली महिला मेयर क्यों नहीं?"
क्या मुंबई में कभी मुस्लिम मेयर बने? हां, कुल 6!
मुंबई (तब बॉम्बे) के नगर निगम इतिहास में मुस्लिम मेयरों की मौजूदगी रही है। इतिहासकार रामचंद्र गुहा और अन्य स्रोतों के अनुसार, कुल 6 मुस्लिम मेयर चुने जा चुके हैं। पहला मुस्लिम मेयर 1934 में बना था, जबकि आखिरी 1963 में। उसके बाद से कोई मुस्लिम मेयर नहीं चुना गया।
यूसुफ मेहरअली (Yusuf Meherally): सबसे प्रसिद्ध नाम। अप्रैल 1942 में बॉम्बे के मेयर चुने गए, जबकि वे येरवदा जेल में बंद थे। स्वतंत्रता सेनानी और समाजवादी नेता मेहरअली ने "Quit India" नारा दिया था। मेयर के रूप में उन्होंने महात्मा गांधी का औपचारिक स्वागत किया।
अन्य मुस्लिम मेयरों में शामिल हैं..
एच.एम. रहीमतुल्लाह
ई.ए. बंदूकवाला
एस.पी. सबावाला (या एम.आई.एम. रौजी जैसे नाम ब्रिटिश काल में)
अन्य नाम जैसे जेबी बोमन-बेहराम (पारसी, लेकिन कुछ सूचियों में मुस्लिम नाम जुड़े)
ब्रिटिश काल (1931 से) में मेयर पद की शुरुआत हुई, जहां सर जेबी बोमन-बेहराम पहले मेयर थे। स्वतंत्रता के बाद 1940-60 के दशक में मुस्लिम मेयर चुने गए, लेकिन 1963 के बाद कोई नहीं।
राजनीतिक बयानबाजी और विवाद
नितेश राणे (बीजेपी): "आई लव महादेव" बोलने वाला मेयर बनेगा, मुंबई हिंदुत्व की भूमि है।
देवेंद्र फडणवीस (सीएम): मराठी मेयर बनेगा।
कृपाशंकर सिंह (बीजेपी): पहले उत्तर भारतीय मेयर की बात की, बाद में पलट गए।
वारिस पठान (AIMIM): संवैधानिक समानता का हवाला देते हुए कहा कि पठान, खान, शेख, कुरैशी, सैयद भी मेयर बन सकते हैं।
BMC चुनाव 15-16 जनवरी 2026 को होने हैं। 227 वार्डों में 227 सीटों के लिए लड़ाई है। महायुति बहुमत की दावेदार है, लेकिन AIMIM मुस्लिम बहुल इलाकों में मजबूत दावेदारी कर रही है।
यह विवाद दिखाता है कि BMC चुनाव अब सिर्फ विकास का नहीं, बल्कि पहचान और ध्रुवीकरण का भी बन गया है।