बलरामपुर में वन भूमि अतिक्रमण हटाने पर बवाल: ग्रामीणों और वन विभाग में झड़प, मारपीट के बाद सख्त कार्रवाई के संकेत

Date: 2026-01-07

वन विभाग की टीम और ग्रामीणों के बीच हुई झड़प, धक्का-मुक्की और मारपीट के बाद मामला गंभीर हो गया है।

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बलरामपुर जिले के रघुनाथनगर वन परिक्षेत्र अंतर्गत पंडरी गांव में वन भूमि से अतिक्रमण हटाने के दौरान हुआ विवाद अब तूल पकड़ता जा रहा है। वन विभाग की टीम और ग्रामीणों के बीच हुई झड़प, धक्का-मुक्की और मारपीट के बाद मामला गंभीर हो गया है। इस पूरे प्रकरण में वन मंडलाधिकारी आलोक बाजपेयी ने स्पष्ट किया है कि वन विभाग के अधिकारियों और कर्मचारियों के साथ झड़प, मारपीट और अभद्रता करने वालों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

मामला पंडरी गांव के केनवारी क्षेत्र का है, जहां ग्रामीणों ने रातों-रात वन भूमि पर अवैध कब्जा कर दुकानों और अस्थायी ढांचे खड़े कर दिए थे। सूचना मिलने पर शनिवार को वन विभाग का अमला अतिक्रमण हटाने पहुंचा। कार्रवाई शुरू होते ही ग्रामीणों ने विरोध शुरू कर दिया, जो देखते ही देखते झगड़े और मारपीट में बदल गया।

आरोप है कि ग्रामीणों ने रेंजर शिवनाथ ठाकुर समेत कई वन विभाग के अधिकारियों और कर्मचारियों के साथ मारपीट की। करीब एक घंटे तक दोनों पक्षों के बीच तनावपूर्ण स्थिति बनी रही।

पुलिस के हस्तक्षेप से हालात नियंत्रित
स्थिति बिगड़ने पर पुलिस को मौके पर बुलाया गया। पुलिस की दखल के बाद मामला शांत हुआ। फिलहाल क्षेत्र में शांति बनी हुई है और किसी अन्य अप्रिय घटना की सूचना नहीं है।

ग्रामीणों ने लगाए गंभीर आरोप
ग्रामीणों ने रेंजर शिवनाथ ठाकुर पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि पहले उनसे पैसे लेकर वन भूमि पर कब्जा करवाया गया और अब वही कब्जा हटाने की कार्रवाई की जा रही है। ग्रामीणों का दावा है कि जितना पैसा दिया जाता था, उतनी जमीन पर कब्जा दिलाया जाता था, जिसके चलते बड़ी संख्या में लोगों ने वन भूमि पर दुकानें लगा ली थीं।

वन मंडलाधिकारी आलोक बाजपेयी ने कहा कि वन विभाग के अधिकारी और कर्मचारी अपने कर्तव्य का पालन कर रहे थे। जिन लोगों ने कानून हाथ में लिया है, उनके खिलाफ कार्रवाई तय है। पूरे मामले की रिपोर्ट तैयार की जा रही है और जांच के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी।

हालांकि ग्रामीणों के आरोपों ने वन विभाग की कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। अब यह देखना अहम होगा कि रेंजर पर लगे आरोपों की जांच किस स्तर पर होती है और क्या इस दिशा में अलग से जांच बैठाई जाती है।

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